जनहित प्रकटीकरण और मुखबिर की सुरक्षा संकल्प, 2004 (पीआईडीपीआई) पर भारत सरकार का संकल्प.

  • भारत सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के किसी भी प्रकटीकरण (खुलासे) की लिखित शिकायतें प्राप्त करने और उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए ‘नामित एजेंसी’ (Designated Agency) के रूप में अधिकृत किया है।
  • इस संबंध में आयोग का क्षेत्राधिकार केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों या किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा या उसके तहत स्थापित किसी निगम, सरकारी कंपनियों, समाजों (Societies) अथवा केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्थानीय प्राधिकरणों तक ही सीमित होगा। राज्य सरकार के तहत कार्यरत कर्मियों तथा राज्य सरकार या उसके निगमों आदि की गतिविधियाँ आयोग के दायरे में नहीं आएँगी।
  • इस संबंध में, शिकायतें स्वीकार करने वाले आयोग की यह जिम्मेदारी होगी कि वह शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखे। इसलिए, सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि इस प्रस्ताव के तहत की जाने वाली किसी भी शिकायत में निम्नलिखित पहलुओं का पालन होना चाहिए:
    1. शिकायत बंद/सुरक्षित लिफाफे में होनी चाहिए।
    2. लिफाफा सचिव, केंद्रीय सतर्कता आयोग को संबोधित होना चाहिए और उस पर “जनहित प्रकटीकरण के तहत शिकायत” (Complaint under the Public Interest Disclosure) लिखा होना चाहिए।
    3. यदि लिफाफे पर उपर्युक्त विवरण अंकित नहीं है और वह बंद नहीं है, तो आयोग के लिए उपर्युक्त प्रस्ताव के तहत शिकायतकर्ता को सुरक्षा प्रदान करना संभव नहीं होगा और शिकायत पर आयोग की सामान्य शिकायत नीति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
    4. शिकायतकर्ता को शिकायत के आरंभ या अंत में अथवा साथ संलग्न पत्र में अपना नाम और पता देना अनिवार्य है।
    5. आयोग बेनामी/छद्मनामी (अनाम या फर्जी नाम से भेजी गई) शिकायतों पर विचार नहीं करेगा।
    6. शिकायत का पाठ/पाठ्य सामग्री इस प्रकार सावधानीपूर्वक तैयार की जानी चाहिए जिससे कि शिकायतकर्ता की पहचान से जुड़ा कोई भी सुराग या विवरण उजागर न हो। हालाँकि, शिकायत का विवरण विशिष्ट और सत्यापन योग्य होना चाहिए।
    7. व्यक्ति की पहचान की सुरक्षा के दृष्टिकोण से आयोग कोई पावती (acknowledgement) जारी नहीं करेगा और व्हिसलब्लोअर्स (शिकायतकर्ताओं) को सलाह दी जाती है कि वे अपने हित में आयोग के साथ आगे कोई पत्राचार न करें। आयोग आश्वासन देता है कि, मामले के तथ्य सत्यापन योग्य होने की स्थिति में, वह भारत सरकार के उपर्युक्त प्रस्ताव में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा। यदि किसी और स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, तो आयोग स्वयं शिकायतकर्ता से संपर्क करेगा।
  • आयोग इस प्रस्ताव के तहत प्रेरित या दुर्भावनापूर्ण/परेशान करने वाली शिकायतें दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
विस्तृत अधिसूचना की एक प्रति आयोग की वेबसाइट http://www.cvc.nic.in पर उपलब्ध है।